Wednesday, March 26, 2014

Reminiscence of Happiness






खुद में झाँक,  इक राग का रियाज़ कर सुबह शाम
सह अपने ही सितम, कर खुद से ही संग्राम
ये धुन सी निकली है इनाम में
उसी को गुनगुना रहा हूँ

मुखड़ा है सवाल… 
कि कभी कभी दूजे कि ख़ुशी से
ये दिल थोडा मुरझा क्यूँ जाता है
ख़ुशी का मौका है , तो मुरझाने का कारण सा नहीं समझ पा रहा हूँ ?

वैसे तो उसकी ख़ुशी में इक लम्हा ख़ुशी का बाँट लेता हूँ  मैं भी
पर इस ख़ुशी में मिले हुए उस दुःख के स्वाद से अचंभित हूँ मैं, और असमंजित भी

अचंभित हूँ कि ये दुःख आया कहाँ से ?
असमंजित यूँ कि कहीं मेरी ख़ुशी ढोंग तो नहीं ?

क्या ख़ुशी बस ढोंग है मेरी ?
खुद को ढालने कि इस दुनिया के सांचे में
कि कहाँ  से ये तारतार दुःख कि लपटें सी हैं छिड़ी ?
दबा रखा था इन्हे दिल के किस कोने में

------------

अनतरा है ख़याल। … 
इतना तो मैं समझता हूँ खुद को, कि ईर्ष्या नहीं है ये
न बदले कि भावना है
तो क्या है ये ?

यह दर्द कुछ अलग है… यह ख़ुशी का दर्द है
ये शायद उन बीते हुए हसीं लम्हों कि आंच कि गर्माहट है
और उस एहसास कि खोयी हुई पुकारती आवाज़ है, जिसे जीवन कि राहों में छोड़ पीछे
जानबूझ कर दुसरे मोड़ चल पड़ा था मैं
सुकून के लिए नहीं, ताज़गी के लिए
और आज जब वोही एहसास फिर सामने खड़ा है, किसी दूजे के लिभास में
तो वापस पुरानी मिठास का अनुभव हुआ है, लम्हे भर के लिए
और फिर उस एहसास के वनवास कि याद से दिल मुरझा पड़ा है

जैसे शायद उस इंसान को , जिसे खीर और जलेबी बहुत पसंद थी कभी
पर दिल के दौरे कि वजह से उसे करनी पड़ी हो इनसे दूरी
और अब जब कभी बरसों बाद, आसपास, कोई जाएज़ा ले रहा होता है इन मिठाइयों का
खुश्बू से ही इक याद तो आती होगी उस इंसान को
और कोई पूछ भी ले खाने को जब, ज़रा सी ही सही
वोही मीठा सा दर्द महसूस तो करता होगा वो भी

यादों कि महक और हवा शायद ऐसी ही होती हैं
एक मीठासापन होता है उस लम्हे के जश्न का
और एक सुनासापन, उस लम्हे के आज न होने का
उस लम्हे को भीड़ में कहीं गिराके, और फिर बहुत ढूंडके भी कहीं खो आने का
या फ़िर अपनी फिक्रत का, जो उस लम्हे से मुड़ कहीं और चल पड़ी
आगे बढ़ने के


धुन मेरी यही हैं - ये गम अलग है, ये बीती हुई ख़ुशी का गम है

Afterword: Sometimes you will see a friend happy, and to your surprise will find your happiness fading. There could be multiple drivers of that depending upon your personality, and your relationship with the person. One of those drivers, that intrigue me the most and that is my favorite in the sense that if ever I get a fleeting sense of unhappiness at somebody's happiness this is the driver I will love to experience compared to any other, and it is sweet-saltish nostalgia. The piece above, which I later realize is expansion on word nostalgia is not complete, because the nostalgia i experience follows the happy-sad - happy chronology. I covered the happy-sad part here, but the last happy part, I couldn't because of lack of skills to merge the thoughts. That's my next task.