अकसर आगे का रास्ता तू ही दिखाता है।
हकीकत से मुलाकात, शख्सियत की असल औकात
शौक़ से तौबा , शक़ पे बे एतबारी
ज़हन में ज़लज़ले, ज़मीर में ज़िम्मेदारी
ये सब एहसास , तू ही तो कराता है
गहराई ,ठहराव, निर्मलता के लिए रास्ता भी बिछाता है
ए ग़म , तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है
तेरे बिना इस ज़िन्दगी का मतलब ही नहीं है