Sunday, May 2, 2021

Ban gaye

आईना बन गए , उजाला बन गए 

सूनेपन में एक उत्साह , इक उमंग बन गए 

उम्मीद बन गए , मुर्शीद बन गए 

Diwali , Holi , और Eid बन गए 

गार्डन में खिलते पौधों की हॉबी बन गए 

सुबह की चाय का बहाना बन गए 

कभी मोमो , कभी चाउमीन का चस्का बन गए 

पस्त होते हौसलों की नींव बन गए 

बहके क़दमों की सीध बन गए 

डगमगाते भरोसे की तरकीब बन गए 

तुम कुछ भी नहीं थे, और अब मेरी तकदीर बन गए | तुम्हारे प्रेम के बहाव ने जीवन में कई मोड़ दिए 

विरक्ति की परत तोड़ वापस इंसान बन गए 

रिश्तों की नाज़ुक डोर के हुनर बन गए 

क्रोध की ज्वाला से समझ के वीर बन गए || 


No comments: