वो रात कुछ जवान थी
ऐसे आज भी याद है जो
छुआ तो था कुछ मुझे
कुछ हुआ तो ज़रूर था
बारिशों का आगाज़ था
कानों में तुम्हारा साज़ था
आँखों के सामने आँखों का सबसे गहरा राज़ था
जो चाहा था कब से पल, वो आज था
क्या दमदार एहसान था
सीधे, ख़ज़ानों के बक्सों में लॉक कर दिया था मैंने।
बाकी ख़ज़ाने को टटोलते टटोलते कभी तुम पर भी नज़र पड़ जाती है
ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात,
एक अनजान हसीना से मुलाकात की रात
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तस्वीर ही तुम्हारी बनाके
उन लकीरों पे आँखें दौड़ाके
तुम्हे छू लिया करता हूँ
खुशबू भी आ जाती है तुम्हारी ,
ज़ुल्फ़ों की शाम भी।
कभी कभी तो लगता है की कहीं तुम मेरी कल्पना ही तो नहीं थीं
ऐसे आज भी याद है जो
छुआ तो था कुछ मुझे
कुछ हुआ तो ज़रूर था
बारिशों का आगाज़ था
कानों में तुम्हारा साज़ था
आँखों के सामने आँखों का सबसे गहरा राज़ था
जो चाहा था कब से पल, वो आज था
क्या दमदार एहसान था
सीधे, ख़ज़ानों के बक्सों में लॉक कर दिया था मैंने।
बाकी ख़ज़ाने को टटोलते टटोलते कभी तुम पर भी नज़र पड़ जाती है
ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात,
एक अनजान हसीना से मुलाकात की रात
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तस्वीर ही तुम्हारी बनाके
उन लकीरों पे आँखें दौड़ाके
तुम्हे छू लिया करता हूँ
खुशबू भी आ जाती है तुम्हारी ,
ज़ुल्फ़ों की शाम भी।
कभी कभी तो लगता है की कहीं तुम मेरी कल्पना ही तो नहीं थीं
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